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माओवादी ने बयान जारी कर कहा बरसों से रह रहे बंगीय एवं आदिवासी समाज के लोगों के बीच वैमनस्यता का जहर घोलने का प्रयास कर रही भाजपा सरकार..

माओवादी ने सोमवार को जारी बयान मे कहा गया है कि नौ अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर पंखाजुर में निकाली गई रैली के दौरान अवांक्षित घटना के बाद फासिस्ट भाजपा सरकार के इशारे पर बरसों से रह रहे बंगीय एवं आदिवासी समाज के लोगों के बीच वैमनस्यता का जहर घोलने का प्रयास किया जा रहा है। नक्सल नेता ने यह भी कहा है कि सरकार द्वारा विस्थापित किए गए बंगीय समाज के नमोशुद्र जाति को अजा वर्ग में शामिल करने की मांग को लेकर नेताओं द्वारा आदिवासी समाज को यह कहकर भड़काने का प्रयास किया जा रहा है कि इससे आदिवासी कोटे में कमी आ जाएगी। बयान में इस साजिश के पीछे विक्रम उसेंडी, विधायक भोजराज नाग, नगर पंचायत अध्यक्ष असीम राय, मनोज मंडल, विकास पाल, गस्तु उसेंडी, सोहन पोटाई व राजाराम तोड़ेम का हाथ होने की बात कही गई है। साथ ही इन नेताओं को चेतावनी दी गई है कि वे उत्पीड़ित जनता को बरगलाने से
बाज आएं। वहीं वरिष्ठ आदिवासी नेता अरविंद नेताम से यह अपील की गई है कि वे उत्पीड़ित आदिवासी जनता व दलित समाज के जायज मांगों का खुला समर्थन करें।
नक्सल नेता ने नेताओं पर बंगीय-आदिवासी समरसता खत्म करने साजिश रचने का लगाया आरोप
सीपीआई माओवादी प्रतिबंधित की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी ने सोमवार को जारी बयान में पूर्व मंत्री विक्रम उसेंडी, पूर्व सांसद सोहन पोटाई, विधायक अंतागढ भोजराज नाग, राजाराम तोड़ेम को चेतावनी दी है। वहीं वरिष्ठ आदिवासी नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम से आग्रह की भाषा में अपील की है। पार्टी के प्रवक्ता विकल्प ने परलकोट में बंगीय व आदिवासी जनता के बीच समरसता खत्म कर दुश्मनी फैलाने के लिए इन नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है।
नक्सल नेता ने आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में कोया, हल्बी, धुरवा, भतरी, उरांव व बंगीय भाषा में बच्चों को प्राथमिक शिक्षा मुहैया कराने की वकालत भी की है।
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