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ग्रामीण आदिवासियों को नक्सली बता कर मारते हैं पुलिस अधिकारी! ये आरोप सुरक्षा बल के जवान ही लगा रहा..

अभी तक आपने बस्तर में आदिवासी ग्रामीणों को नक्सली बता कर फर्जी मुठभेड़ करने, उन्हें जेल में फर्जी तरीक़े से ठूसने को लेकर मीडिया रिपोर्ट पढ़ी होगी, मानवाधिकार कार्यकर्ताओ को लड़ते देखा होगा , वकीलों को न्याय के लिए गुहार लगाते देखा होगा लेकिन  बस्तर के आदिवासियों के लिए जो भी आवाज उठाते थे सरकार उन्हें नक्सली समर्थक बताती थी, मानवाधिकार कार्यकर्ताओ के पुतले दहन करवाती थी लेकिन इस बार तो बस्तर में तैनात सुरक्षा बल के जवान ने ही अपने आलाधिकारियों पर बस्तर के आदिवासियों को फर्जी मुठभेड़ में मारने उन्हें फर्जी आरोपो में जेल में बन्द करने का आरोप लगाया है? इस आरोप से पुलिसिया महकमे में सनसनी फैल गई है ।  जी हां ये वही जवान है जो बासागुड़ा कैम्प में आपसी विवाद में 4 जवानों पर गोलियां बरसा कर हत्या करने का आरोप है। जवान ने मीडिया के सामने कहा है कि "420 की घटनाएं कर रखे है जिन चीजों  के बारे मे, में जानता हूं। आगे कहा कि तिमापुर कांड में कैसे एक लड़के को मार दिए में बताऊंगा। उसने मीडिया के सामने खुलासे करने की बात कही। वो कहते है कि अधिकारी फर्जी भुठभेड करते है, फर्जी आरोपो में आदिवासियों को जेल में डाल देते है"

आरोपी  सीआरपीएफ जवान  संत कुमार ने अपने आप को पूरे मामले में फंसाए जाने की बात कही और कहा कि  अपनी ड्यूटी दो बजे से चार बजे तक करने के बाद अपने रूम मैं आया और हाँथ मुँह धोने के लिए पानी लेने निकल था इसी दौरान गोलियां चलने आवाज़ आई तो मैं भी उस तरफ भागने लगा इतने में मुझे आरोपी बताते हुए पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया जबकि मेरे पास दूसरी हथियार होती है और जबकि गोली किसी और के हथियार से चली है।मेरे साथी आपस में एक दूसरे के ऊपर गोली चलाये है जिससे यह घटना हुई है।मेरा उनसे मदभेद रहे है लेकिन छोटी मोटी बातो पर ऐसी घटना को कोई अंजाम देता है क्या।छोटी मोटी बात हमेशा एक दूसरे से होती रहती है वैसा मेरे साथ भी था।मैं भी अपने परिवार के लिए यंहा आया हूँ और वे सभी भी अपने परिवार के लिए यंहा आये हुए थे।मै अपने साथियों को नही मारा हूँ और में पूरी तरह से निर्दोष हूँ।

मालूम हो कि प्रदेश में महिला  अधिकारी शोसल।मीडिया फेसबुक में पोस्ट कर सरकार को कटघरे में खड़े करते हुए  कहा था कि "मैं मामूली आदिवासी लड़कियों की यातना की साक्षी हूं … पुलिस स्टेशनों में, महिला कर्मियों ने 14 और 16 साल की लड़कियों को कपड़ उतारे और उन पर अत्याचार किया … उनके हाथों और स्तनों पर बिजली का झटका दिया गया।
फिर एक बार आरोपी जवान के हवाले से आरोप है कि सुरक्षा बल के जवानों द्वारा आदिवासियों को नक्सल उन्मुलन के नाम पर फर्जी नक्सली करार देकर मारा जा रहा है। उन्हें फर्जी आरोपो में जेल में बन्द किया जा रहा है।
सवाल यह है कि क्या अब सरकार आरोपी जवान के आरोपो का जवाब दे पाएगी क्या किसी हद तक बस्तर में आदिवासियों के साथ अमानवीय आत्याचार का वह जवान प्रत्यक्ष उदाहरण है।
क्या है मामला..
आप को बता दे कि बीजापुर जिले में 9 दिसम्बर की  शाम सीआरपीएफ के जवान संतकुमार ने किसी बात को लेकर साथी जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिसमें 4 जवानों की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी, जबकि एक अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हो गया है। घायल जवान को बीजापुर में प्राथमिक उपचार के बाद रायपुर रेफर कर दिया गया है। बस्तर डीआईजी पी सुंदरराज ने वारदात की पुष्टि करते हुए बताया था कि यह घटना बीजापुर जिले के बासागुड़ा कैम्प में घटित हुयी है। सीआरपीएफ 168वीं बटालियन के आरक्षक संतराम ने अपने साथियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिसमें एसआई वीके शर्मा, एसआई मेघसिंह, एएसआई राजवीर एवं आरक्षक जीएस राव की मौके पर ही सांसें थम गयीं, जबकि एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया है। 


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