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बस्तर में क्या नए साल में बेगुनाह आदिवासियों को न्याय मिलेगा या हर साल की तरह उनकी झोली में अन्याय ही आएगा?

बस्तर में क्या नए साल में बेगुनाह आदिवासियों को न्याय मिलेगा या हर साल की तरह उनकी झोली में अन्याय ही मिलेगा? आदिवासी महिलाओं के साथ कही फिर तो बलात्कार नही होगा? उनका स्तन फिर निचोड़ कर मातृत्व तो नही खोजा जाएगा ? बच्चियों को फिर किसी उत्सव के बहाने उनका शोषण तो नही होगा? 

क्या साल दर साल आदिवासियों को नक्सली बता कर मारने का सिलसिला इस साल भी अनवरत जारी रहेगा? कॉरपरेट मुनाफे के लिए आदिवासियों की जमीने फिर से छिनी तो नही जाएगी? आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों का गला फिर इस साल तो घोटा नही जाएगा?  

बस्तर संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आता है आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए ही 1996 में पंचायत एक्सटेन्शन टु द शेड्यूल्ड एरियास (पेसा) कानून है बस्तर में आदिवासियों को स्वायत्त शासन का अधिकार प्राप्त है फिर भी आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक तौर पर प्रभुत्व उन ठेकेदारों, व्यापारियों और अन्य अधिकारियों के हाथों में है जो आदिवासी नहीं है!

बस्तर में 44 प्रतिशत हिस्सा जंगल है खनिज संपदा लोहा, कोयला, चूना पत्थर, बॉक्साइट आदि खनिजों का भंडार है, लेकिन संविधान की धज्जियां उड़ाते मौजूदा सरकारे कॉरपरेट फायदे के लिए लुट मचा रखी है और यही नक्सलवाद है।  क्या नए साल आदिवासियों को उनका संवैधानिक दर्जा मिलेगा? संविधान का पालन होगा या फिर कोई मछली पकड़ रही रामे गाय चरा रही मड़कम मरती रहेगी? 

नए साल बस्तर को फिर विकास के सपने तो नही दिखाए जाएंगे? जवानों के शहादत से बनी सडके फिर उखड़ जाएगे? पत्रकार फिर बताएँगे लालागढ़ की सडके उखड़ी? 

नए साल में फिर से युद्ध तो नही होगा? फिर कोई माँ अपना लाल खो डालेगी और सरकार मुंह तोड़ जवाब में नक्सलवाद खत्म कर देगी? मुआवजा का झुनझुना फिर पकड़ाया जाएगा।

नए साल में फिर तो निर्भीक पत्रकारों को धमकाए नही जाएंगे? या फिर न्याय के लिए लड़ वकीलों को बस्तर से भगाए जाएंगे? या मानवाधिकार कार्यकर्ताओ के पुतले जलाये जाएंगे? 

बस्तर नए साल में भी तो नही जलेगा ? किसके माटी के घर के दीपक बूझ जाएंगे? 
तो पुराने साल का बस्तर  आदिवासी महिलाओ का बलात्कार युही भुला देगा, क्या बस्तर निर्दोषों का छल्ली सीना खून से लतफत युही भुला देगा क्या बस्तर घर से बेखर होना भुला देगा।

नही न तो फिर नए साल का क्या मतलब? साल दर साल बस्तर से बलात्कार की आवाजे आती रही, बेगुनाहों की चीखे गूंजती रही, निर्दोष चिल्लाते रहे लेकिन एक में भी कार्यवाही नही हुई जो हुआ कार्यवाही वो भी एक दिखावा! आग,गोली,बारूद फिर इस साल बस्तर की झोली में आएगा या फिर पत्रकार अपना हेडलाईन नक्सलगढ़, लालआतंक,खूनी सड़के बनाएंगे? कब आएगा आखिर बस्तर का नया साल...

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