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बस्तर में आदिवासियों के ऊपर नक्सली तमगा लगा कर इन दिनों पुलिस फर्जी मुठभेड़ चाल चल रही ताकि प्रमोशन का तमगा लग सके



जारपल्ली गाँव में सोनी सोढ़ी,लिंगा, पुष्पा रोकड़े,नितिन रोकड़े (फोटो-पुष्पा रोकड़े)

नक्सली नेता का गनमेन  कोसी सोढ़ी बता के जिस महिला को मारा गया वह पोडियम जोगी है जो की गांव की एक आम आदिवासी महिला है 


तामेश्वर सिन्हा 

बस्तर। बस्तर में आदिवासियों के ऊपर नक्सली तमगा लगा कर इन दिनों सरकार फर्जी मुठभेड़ चाल चल रही है, बस्तर के जंगलो में हर दिखने वाला सख्श पुलिस को नक्सली नजर आता  है, जंगल के रखवाले आदिवासी जंगल में नही दिखेंगे तो फिर कहा दिखेंगे! उन्हें मौत के घाट उतार दिया जाता है, आदिवासी लगातार साफ्ट टारगेट के तहत एक-एक कर मौत के मुंह में समा रहे है. पुलिस को यह भी नही मालूम रहता जिसे वो खूंखार,वारंटी बता रहे है उसका नाम क्या है? बस उसे मारना मूल उधेश्य रह जाता है.
हाल ही 15 दिसम्बर को सुरक्षाबल ने बीजापुर जिले के उसूर ब्लाक अंतर्ग्रत जारपल्ली में एक नक्सली नेता पापाराव की सहयोगी बता कर कोसी सोढ़ी को मुठभेड़ में मारने का दावा करती है लेकिन पुलिस के दावे के उलट पूरा घटना क्रम एक फर्जी मुठभेड़ नजर आता है 15 दिसबंर को पुलिस ने जिस  कोसी सोढ़ी को नक्सली
पोडियाम जोगी का रशान कार्ड जिसमे नाम पोडियाम जोगी है 
बता के मारने का दावा किया था जबकि वाह शव जा रपल्ली के पोडियम जोगी पिता पोडियम दुल की है.

आदिवासी नेत्री सोनी सोढ़ी, लिंगा कोडोपी, पत्रकार पुष्पा रोकड़े. नितिन रोकड़े और उसूर ब्लाक अध्यक्ष पुनेम जब जारपल्ली गाँव पहुंचे तो पूरा घटना चौकाने वाला था, पत्रकार पुष्पा रोकड़े बताती है कि जिलामुख्यल के उसूर ब्लाक के जारपल्ली गाँव की एक महिला जिसे पुलिस ने मुठभेड़ में मार कर नक्सली बताया था उसे गांव के लोगो ने बताया कि मारी गई महिला का शव पीडियम जोगी का हैं ।जब कि पुलिस ने प्रेस रिलीज में उसी शव का नाम ईनामी और पापा राव के गन मेन के नाम पर कोसी सोढ़ी बताया।
गाँव में दौड़ा-दौड़ा कर मारा पोडियम जोगी को 

बाड़ी में मौजूद खाली खोखे 
गाँव वालों ने बताया कि 15 दिसबंर 2017 को मड़ावी आयते नामक रिश्तेदार के घर पोडियम जोगी  आई थी जब वाह सुबह 9 बजे अपने घर जाने के लिया हाथ मे झोला पकड़ के जा रही थी उसी समय रास्ते मे उसे पुलीस ने घेर लिया घर पोडियम जोगी दौड़ने लगी लगभग 500 मीटर दोडने के बाद एक घर मे अन्दर जैसे ही पोडियम जोगी जा ही रही थी कि उस पर सुरक्षाबल के जवानो ने गोली चला दी पोडियम जोगी घायल होके फिर भागने लगी भागते हुए एक घर की बाड़ी में जा पहुंची जहा उसे मौत के घाट उतार दिया गया गोली कि आवाज से आस पास घरों से जब लोग बाहर आए तो देखा जवानो ने एक महिला को जल्दी जल्दी प्लास्टिक में लपेट लिया, शव ले जाने के लिए गाँव के चार लडको को मारपीट किया गया गाँव के चार लडके शव को चारपाई में पामेड थाना ले गए, चंद घंटो के बाद गाँव की महिलाए एकजुट होकर पामेड थाना पहुंची. सोनी सोढ़ी को गाँव वालो ने बताया कि जब महिलाए पोडियम जोगी का शव मांगने लगी तो उन्हें मारापीटा गया उन्हें कभी सुकमा जाने को तो कभी बीजापुर जाने की बात कही गाँव की महिलाए वापस लौट गई लेकिन पोडियम जोगी का शव लेकर जो लडके आए थे उन्हें नही छोड़ा गया 16 को उन लडको को छोड़ा गया. लडको ने गाँव आकर बताया कि पोडियम जोगी का शव बीजापुर में है तब गाँव वाले 16 को ही बीजापुर शव लेने गए जहा उन्हें 17 को पोडियम जोगी का शव दे दिया गया. 

6 दिन से अंतिम संस्कार नही हुआ 
सोनी सोढ़ी ने बताया कि गाँव वाले पोडियम जोगी का शव गाँव वापस लाने का बाद बिना अंतिम संस्कार किए शमशान में शव को 20 तारीख तक रखे हुए थे जहा गावं के लडके शव को जानवरों से बचाने के लिए रात-दिन पहरा देते थे . 20 तारीख डॉ देर रात सोनी सोढ़ी झारपल्ली गाँव पहुंची जहा 21 तारीख की शाम तक पोडियम जोगी का अंतिम संस्कार किया गया.सोनी सोढ़ी ने बताया कि गाँव वाले 6 दिन तक पोडियम जोगी की शव को रखे हुए थे उनका अंतिम संस्कार भी आदिवासी रीतिरिवाज से नही किया गया है. 
शव को न्याय की आस में पिता पोडियम दुल ने जमीन में दफना दिया ।पिता ने शासन-प्रशासन से मांग किया है कि उसकी बेटी के लिए न्याय हो क्यों कि वही घर की एकलौती कमाने वाली थी। पिता ,भाई,और पूरे घर का भरण पोसड करती थी. नक्सली बता कर उसे मौत के घाट उतार दिया गया है. 

ग्रामीण सदमे में 
पत्रकार पुष्पा रोकड़े कहती है कि पुलिस जिसे जंगल में मारना बता रही है उसे पुरे गाँव में दौड़ा-दौड़ा कर मारा गया है यही नही पूरे गांव में कई महिला और लड़कों से मारपीट भी किया गया है, जिस बाड़ी में पोडियम जोगी को मारा गया वाह अभी तक खाली खोखे मौजूद थे. इस पुरे घटना क्रम से ग्रामीण अभी भी सदमे में  है बड़ी बेरहमी से पुलिस के जवानो  ने  पीडियम जोगी को मार दिया । पत्रकार पुष्पा रोकड़े बताती है कि गाँव में मड़ावी नन्दा ,तेलम हुगा,हडमा मदकांम,सतीश पोयम,देवा कुंजाम ,हिरमा, ग्रमीणों के साथ मारपीट किया गया है. 

आदिवासियों को एक-एक क्र मारा जा रहा है 

सोनी सोढ़ी ने बताया कि किसी की मौत एक निरीह महिला को मिली. सोनी बताती है कि उन्हें ओपचारिक तौर पर गाँव बुलाया गया था आगे वाह कहती है कि ग्रामीणों मेंसरकार को लेकर काफी घुस्सा है आदिवासियों को नक्सली बता एक-एक कर मार रही है, उससे अच्छा एक साथ मार देइसको लेकर उग्र आन्दोलन किया जाएगा










नोट- यह रिपोर्ट जारपल्ली गए आदिवासी नेत्री सोनी सोढ़ी,पत्रकार लिंगा कोडोपी,नितिन रोकड़े,पुष्पा रोकड़े के आधार पर है पत्रकार लिंगा कोडोपी द्वारा बनाया गया वीडियो यह देख सकते है 

यह विडीयों जारपल्ली गाँव को लेकर हैं, जहाँ बिजापूर पुलिस ने नक्स्ल मुठभेड़ दिखाया हैं, लेकिन गाँव वालों का कहना है की कोई मुठभेड़ हुआ ही नही हैं। हम उस घटना की जानकारी लेने के लिए उस गाँव तक सोनी सोरी के साथ गयें थे। छत्तीसगंढ़ राज्य के बस्तर पुलिस केवल प्रमोश और तमगो के लिए नक्सल के नाम पर आदीवासीयों को नक्सल बना कर एनकाउटर करती हैं और नक्सल मुठभेड़ बताती हैं आदीवासी मारो पैसा कमाओं प्रमोशन पाओं। ग्रह मंत्रालय नक्सल उन्मूलन के नाम पर छत्तीसगंढ़ राज्य सरकार को मनमाने धन प्रदाय कर रहा हैं। धन्य हैं मेरा भारत। भारत सरकार का ग्रहमंत्रालय भी धन्य है बिना जांच के प्रमोशन और तमगे दिया करती हैं। (लिंगा कोडोपी )








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