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भू-राजस्व संहिता में संशोधन भारत के संविधान की मूल भावना पर हमला आदिवासी समाज करेगा 6 जनवरी को विरोध, राजस्व मंत्री के साथ आदिवासी मंत्रियो ने प्रेस कांग्रेस में कहा समाज में कांग्रेस फैला रही भ्रम



छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शीतकालीन सत्र में भू राजस्व संहिता संशोधन विधेयक 2017 पास करने के विरोध में छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के आह्वान पर छत्तीसगढ़ प्रदेश के  सभी जिलों में 6 जनवरी 2018 को आदिवासी समाज के द्वारा धरना ,प्रदर्शन, रैली आयोजित किया जा रहा है । इसी बिच सरकार ने आज सफाई में अपना पक्ष रखते हुए राजस्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडे के साथ आदिम जाति कल्याण विकास मंत्री केदार कश्यप और वन मंत्री महेश गागड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कांग्रेस पर आदिवासी समाज को भ्रम में रखने का आरोप लगा दिया. और कहा कि आदिवासियों कि जमीन सिर्फ केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार उनकी मर्जी से जमीन ले सकती है

 आप को बता दे कि राज्य सरकार द्वारा शीतकालीन सत्र में भू राजस्व संहिता संशोधन विधेयक 2017 पेश की गई है ,जो की असंवैधानिक अपराध है, छत्तीसगढ़ सरकार का यह संशोधन भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(5),19(6), 244 (1), 143, 275, 368,13( 3) के प्रावधानों पर सीधा प्रतिघात है ।यह संशोधन भारत के संविधान की मूल भावना पर हमला है। आदिवासी समाज इस काला नियम की कड़े शब्दों में विरोध जाहिर करता है ।सर्व आदिवासी समाज का कहना है कि आदिवासी समाज की जमीन अहस्तांतरणीय राजस्व है। भारत देश की रूलिंग लेंड रेवेन्यु रूल्स 1879 ,1921 ,1972 के आधार पर संचालित व नियंत्रित होती है ।भारत सरकार के अधिनियम 1985 के अनुच्छेद 91, 92 के तहत एक्सक्लूटेड व पारिस्थिति एक्सक्लूटेड एरिया की जमीन आदिवासी समुदाय के सामुदायिक नैसर्गिक संपत्ती है ।यह क्षेत्र नान रेगुलेटेड क्षेत्र है। अनुसूचित क्षेत्र में न केंद्र न राज्य और ना ही अनुसूचित व्यक्ति/ संस्था की 1 इंच जमीन भी नहीं है तो वह कौन सी जमीन पर सरकार काला कानून थोपना चाहती है। अनुसूचित क्षेत्र में लोकसभा ,विधानसभा कोई भी कानून सीधे लागू करने में अयोग्य है। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी पुष्टि समता का फैसला 1997 में कर दी है तभी पांचवी अनुसूची के पैरा 2 5 में प्रावधान हैं जो कि अनुच्छेद 368 से संबंधित है ।राज्य सरकार यह संशोधन भारत का सविंधान के उपरोक्त अनुछेदो के विपरीत राजद्रोह का अपराध है । 
 


विदित हो कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र में 21 दिसम्बर को विपक्ष के भारी विरोध के बीच रमन सरकार की ओर से इस संशोधन विधेयक को पारित किया गया। राजस्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय ने संशोधन विधेयक पेश करते हुए कहा कि भू अर्जन की प्रक्रिया सरल होने से विकास में आ रही अड़चनें दूर होंगी। विधेयक के पक्ष में 43 और विपक्ष में 31 मत पड़े।

 विधयेक पा होने के 24 घंटे के भीतर ही इसका विरोध शुरू हो गया था 23 दिसम्बर को बस्तर संभाग सहित सरगुजा था कोरबा, बलौदा जिले में मुख्यमंत्री तथा सत्ता के आदिवासी मंत्रियो का पुतला फूंका कर विरोध जताया गया था ।  इस विधयेक के पारित होने से समाज में आदिवासी मंत्रियों को लेकर भी काफी रोष है, कि उनके होते हुए इस तरह आदिवासी विरोधी कानून पारित किया गया।वही आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आदिवासी मंत्री केदार कश्यप , महेश गागड़ा, राम सेवक पैकरा के शामिल होने से समाज उग्र हो गया है ।

शीतकालीन सत्र में भू राजस्व संहिता संशोधन विधेयक 2017 पास करने के विरोध के आलवा आदिवासी समाज कि विभिन्न मांग है जिसमे

छत्तीसगढ़ में वर्ष 2004 के पूर्व सवरा, भारिया ,भूमिया, भूईहार, पंडो,नागवंशी आदि जाति को आदिवासियों के आरक्षण का लाभ प्राप्त होता था। किंतु 2004 के पश्चात छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मात्रात्मक त्रूटी बताकर आरक्षण देना बंद कर दिया गया है। अतः सभी जनजातियों के उप जातियों को छत्तीसगढ़ गठन के बाद मिलने वाली संपूर्ण लाभ बैकलॉग के आधार पर दिया जावे।
महाराष्ट्र राज्य के अनुसूचित क्षेत्र में तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के शासकीय सेवा में शत-प्रतिशत आदिवासियों को नियुक्ति करने की अधिसूचना जारी की गई है ।छत्तीसगढ़ राज्य मैं महाराष्ट्र की तरह अनुसूचित क्षेत्रों में तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के पदों पर शासकीय सेवा में शत प्रतिशत भर्ती किया जावे।
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में निर्दोष आदिवासियों को पुलिस एवं सुरक्षा बल द्वारा नक्सली बता कर मारपीट कर गिरफ्तार कर जेल में बंद कर दिया जाता है ।केवल खेती किसानी एवं मजदूरी कर पेट पालने वाले निर्दोष आदिवासियों को पुलिस का मुखबिर मानकर नक्सली करार देते हैं ।वही सुरक्षा बल द्वारा भी नक्सलियों से मिलीभगत का आरोप लगाकर गोली मार दी जाती है ।इस प्रकार दोनों ओर से आदिवासी मारे जा रहे हैं। पुलिस द्वारा अनेक आदिवासियों को फर्जी तरीके से नक्सली बताकर समर्पण कराया जा कर वाह वाही लूटी जा रही है ।सर्व आदिवासी समाज इसका घोर विरोध करता है एवं जेलों में बंद आदिवासियों की निशर्त रिहाई की मांग करता है ।
5) छत्तीसगढ़ के अनुसूचित क्षेत्रों में शासन द्वारा स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, छत्तीसगढ़ संवाद आदि अनेक विभाग में कर्मचारियों की भर्ती आउटसोर्सिंग के माध्यम से किया जा रहा है। जबकि अनुसूचित क्षेत्र में ही आदिवासी वर्ग के हजारों पढ़े लिखे योग्य युवा बेरोजगार हैं। इस प्रकार शासन द्वारा आदिवासी वर्ग के शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार नौकरी ना देकर उनके मूल अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। आउट सोर्स की कार्रवाई तत्काल बंद किया जाए। इसका पुरजोर विरोध करता है एवं मांग करता है कि छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को ही शासकीय सेवा में भर्ती किया जावे ।
छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के द्वारा संचालित स्कूलों को शिक्षा विभाग को सौंप दिया गया है ,जिसके कारण आदिवासी कल्याण विभाग का अस्तित्व समाप्त प्राय हो गया है ।सर्व आदिवासी समाज मांग करता है कि आदिम जाति कल्याण विभाग को पूर्ववत संचालित किया जावे।
अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समाज के बहन ,बेटियों के साथ शारीरिक शोषण एवं अत्याचार आम बात हो गई है ।इतना ही नहीं बस्तर में सुरक्षाबलों के द्वारा आदिवासी महिलाओं के साथ अश्लील हरकत ,बेइज्जत करने के कारण आदिवासी समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है ।ऐसी घटनाओं पर शासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किया गया है ।
अतः आदिवासियों की सुरक्षा संबंधी कार्यवाही तत्काल सुनिश्चित किया जावे ।साथ ही छत्तीसगढ़ में अन्य वर्ग के लोग आदिवासी समाज के भोले भाले बेटियों को बहला-फुसलाकर शादी करके उनके नाम से बेनामी संपत्ति अर्जित करते हैं ।शासकीय योजनाओं का लाभ लेते हैं और बाद में उनके साथ नौकर की तरह व्यवहार कर उनका शोषण करते हैं। क्योंकि अन्य वर्ग का व्यक्ति केवल आरक्षण और अन्य लाभ के लालच में ही आदिवासी समाज की बेटियों से विवाह करता है। इसलिए ऐसे अंतरजातीय विवाह करने वाले आदिवासी महिलाओं को विवाह पश्चात आरक्षण से मिलने वाली सभी सुविधाओं से वंचित किया जावे। साथ ही पूर्व में इस तरह के जितने भी प्रकरण हैं उस पर जांच किया जा कर कठोर कार्यवाही किया जावे ।जिससे भविष्य में ऐसे मामलों पर रोक लग सके ।
कांकेर जिला के पखांजूर में विधि सम्मत बसाए गए शरणार्थियों के अलावा बहुत अधिक मात्रा में घुसपैठिए प्रवेश कर लिए हैं ।उन्हें तत्काल वहां से हटाया जाए ।कमिश्नर बस्तर संभाग द्वारा दिनांक 29-9-2017 को लिए गए बैठक के परिपेक्ष में तत्काल आदेश प्रसारित किया जावे ।छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भू राजस्व संहिता की धारा 165 में किए गए संशोधन जिसमें आदिवासी की भूमि को विक्रय किए जाने की अनुमति दी जाने का प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज इस का घोर विरोध करती है।
उपरोक्त मांगों के संबंध में सर्वाधिक समाज छत्तीसगढ़ द्वारा पूरे प्रदेश के 146 विकासखंडों में विकास खंड स्तरीय धरना प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है। सर्व आदिवासी समाज ने सभी सामाजिक जनों से विनम्र अपील की है कि उक्त धरना, प्रदर्शन ,रैली में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनावे।


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