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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी है कायाल इस आदिवासी हुनर बाज के, मुंह से नही नाक से बजाते हैं बांसुरी...


तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट

बस्तर- मिलिए छत्तीसगढ़ के आदिवासी बृजलाल नेताम से। बस्तर के बीहड़ों में झोला लटकाए आंखो की दिव्यांगता को चुनौती देते मुंह से नही बल्कि नाक से बांसुरी बजा कर अपने हुनर का प्रदर्शन कर रहे है। बांसुरी की मधुर धुन सुनना हर किसी को अच्छा लगता है। अक्सर आपने कई कलाकारों को बांसुरी की मधुर धुन बजाते देखा होगा। आज हम ऐसे ही एक कलाकार की बात कर रहे हैं। स्थानिय बस्तर की बोली गोंडी- हल्बी हो या बॉलीवुड के गाने बृजलाल नाक से बांसुरी बजा कर हर धुन निकल लेते है। छत्तीसगढ़ बस्तर के कोंडागांव जिले अन्तर्गरत विश्रामपुरी ब्लॉक के बड़ागांव में रहने वाले बृजलाल नेताम के हुनर के कायल देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी है । अफसोस बृजलाल के पास एक इंदिरा आवस, और 350 रुपये पेंशन के अलावा कुछ नही है। दो बच्चों को पढ़ाने परवरिश करने बृजलाल को अपने हुनर का प्रदर्शन कर मांग कर खाना पड़ रहा है। एक आदिवासी कलाकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के बावजूद आज पेट पालने दर-दर की ठोकरे खा रहा है। 45 साल का बृजलाल नेताम अपनी दोनों आंखों से दिव्यांग है, नेताम ने अपनी आंखों की रोशनी बचपन में ही खो दी थी। तब से ही वह बांसुरी बजा कर और बेचकर अपना जीवन यापन कर रहा है। बृजलाल पहले मुंह से बांसुरी बजाता था, लेकिन एक दुर्घटना ने उनके अंदर एक नया हुनर दे दिया। दरसअल, बृजलाल एक दिन सड़क पार करते हुए दुर्घटना का शिकार हो गए और उनका जबड़ा और दांत टूट जाने के कारण वो बांसुरी बजाने में असमर्थ थे। लेकिन इसके बाद भी बृजलाल ने हार ना मानते हुए नाक से बांसुरी बजाने का अभ्यास किया और अब वो नाक से बांसुरी बजा कर जीवन-यापन कर रहे हैं। आप को बता दे कि अक्टूबर 2017 में दिल्ली के पूसा ग्राउंड में प्रख्यात राष्ट्रवादी नानाजी देशमुख की जन्मशती के मौके पर प्रदर्शनी लगाई गई थी। इसमें प्रदर्शनी में देश में हो रहे विकास और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रस्तुत किया गया था। इसमें छत्तीसगढ़ के बस्तर से बृजलाल प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभान्वित के रूप में वहां पहुंचे थे। जहाँ वो नाक से बांसुरी बजा रहे थे। नेत्रहीन दिव्यांग बृजलाल अपनी धुन में मगन था। तभी प्रदर्शनी का भ्रमण कर रहे PM नरेंद्र मोदी ने उनका धुन सुन कर पास आकर उनसे मुलाकात की थी। मुलाकात के पश्चात उनके हुनर को देखते प्रशासनिक अफसर से लेकर नेताओ ने उन्हें झूठे वादों की भंगर में फंसाए रखा मसलन आज तक बृजलाल के पास एक इंदिरा आवास और पेंशन कर आलावा कुछ नही मिला है। बृजलाल नेताम कहते है उन्हें दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिले थे। प्रधानमंत्री ने उनसे हाथ भी मिलाया जो दूसरे दिन अखबार में भी छपा था उसके गांव और आस-पास के सभी लोग उसे जानते है । लेकिन पेट पालने के लिए हाथ मिलना नही रोटी चाहिए जिसके लिए वह अब भी नाक से बांसुरी बजाते हैं। बृजलाल आंख से दिव्यांग है मगर उनके झोले में रखे तंबाखू पैकेट कौन से कंपनी का है छु कर बता देते है । बृजलाल बताते है पहले जब नोटबन्दी नही हुआ था तब नोटो को छु कर कितने रुपये का नोट है बता देते थे लेकिन अब नए नोट को नही बता पाते है । बृजलाल लोगो आवाज़ से पहचान लेते है एक बार जिनसे बात कर लिए उनकी आवज सुनकर उनका नाम बता देते है । बरहाल प्रधानमंत्री नरेंद मोदी से भेंट कर चुके आदिवासी बृजलाल अपने नाक से बांसुरी बजाने के हुनर का प्रदर्शन करते बस्तर के बीहड़ों में पेट पालने के लिए दर-दर की ठोकरे खा रहे है। जहाँ जगह मिल जाए वहां सो जाते है। जहाँ खाना मिले वाह खा लेते है । जिसे सरकारी मदद का अभाव है । गौर करने वाली बात यह भी है कि छत्तीसगढ़ में लोककलाकारों की उपेक्षा होते रहती है।




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