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अडानी कही टाटा पारी पारी पांव पसारे हैं, मालिक इस माटी के अब दो गज के सहारे हैं...



by-sonu

जमीन की असली पुत्र 
भोले कोयतूर प्यारे हैं।
 लुट कर सबने उनको
जुल्मों से मारे हैं, 
कही अडानी कही टाटा
पारी पारी पांव पसारे हैं, 
मालिक इस माटी के अब
दो गज के सहारे हैं, 
नही मिली है हक उनको
न ही किसी ने आंसु संवारे हैं, 
जब भी उतरा रण क्षेत्र में
कई कई दुश्मन मारे हैं, 
था वीरनारायण सा मसीहा यहा तो
अब क्यों भुखे , नंगे बेचारे हैं,
अब आंख धधकती है 
सीने में
आंखों में अंगारे हैं।
बेशुध, निर्बल,  नंगे , भुखे
आज प्रकृति के इशारे हैं 
है अगर क्रांति का रंग लाल तो
बंदुक हाथ मे किसने डाले हैं, 
रणनीती है तुम्हारी
मुझको बर्बाद करने की
निर्बल, निर्दोषों का कत्ल कर
चारों ओर लहु के नजारे हैं।

आग धधकती है सीने मे,
आँखोँ से अंगारे,
हम भी वंशज है गुंडाधूर के,
कैसे रण हारे हैं.?
कैसे कर विश्राम रुके हम...?

जब इतने कंटक हो,
कोयतूर विश्राम करे क्योँ,
जब गोंडवाना पर संकट हो.
अपने तीर उठा लेते है,
बिन पल को हारे हैं,
आग धधकती है सीने मे,
आँखोँ से अंगारे हैं, 
सारे सुख को त्याग खडा है,
कोयतूर युँ तनकर,
अपने सर की भेँट चढाने,
गोंडवाना  का युँ बनकर..
बालक जैसे अपनी माँ के,
सारे कष्ट निवारे है, 
आग धधकती है सीने में,
आँखोँ से अंगारे हैं।


सोनू रुद्र मरावी आदिवासी युवा प्रभाव के अध्यक्ष है , और बेहतरीन धार-धार कविता लेखनी से जाने जाते है ।




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